गूगलक्रोम जिसका मालिक गूगल है यह इंटरनेट को एक्सेस करने का सबसे फेमस ब्राउज़र है जिसका निर्माण 1 सितंबर 2008 को किया गया था।
क्या आपको पता है इसके 4 वर्जन हैं जिसमें से गूगल क्रोम सबसे सिक्योर और स्टेबल वर्जन है जिसे हम अधिकतम यूज करते हैं और यह लगभग हर device में आसानी से देखने को मिल जाता है।
इसके अलावा इसके वर्जन जिसके नाम canary,beta,और dev है। इन तीनों वर्जन को हम टेस्टिंग वर्जन भी कहते हैं । इन तीनों वर्जन में टेस्ट करने के बाद ही सिम्पल ,साधारण, सिक्योर ब्राउज़र में अपडेट दिया जाता है।
गूगल क्रोम के वर्जन को डिटेल में जान लेते है:-
1) सिम्पल, साधारण, सिक्योर क्रोम वर्जन:- इस वर्जन को इसके दूसरे वर्जन के टेस्ट के बाद अपडेट दिया जाता है यह वर्जन सिक्योर होता है इसे आप सिंपल प्ले स्टोर पर जाकर गूगल क्रोम सर्च करने पर आसानी से मिल जाएगा इसको हम स्टेबल वर्जन भी कहते हैं।
Beta वर्ज़न: भजन स्टेबल वर्जन बनने का एक कदम पहले का बीटा वर्जन स्टेबल वर्जन स्टेबल वर्जन बनने का एक कदम आगे का आगे का प्रोसेस है।
क्रोम बीटा कुछ bugs के साथ stable (स्थिर) है जिसे अपडेट करने से पहले ज्यादा फिक्स किया जाता है।
बीटा वर्जन स्टेबल वर्जन बनने का अंतिम स्टेज है।क्रोम बीटा वर्जन को सिम्पल क्रोम से ज्यादा व पहले अपडेट मिल जाता है और यह सिम्पल क्रोम की तुलना में ज्यादा bugs के साथ पाया जाता है।
3) इसके बाद तीसरा दर्जन dev वर्जन आता है इसमें बीटा वर्जन से भी अधिक bugs वunstable होता है जिससे किसने बीटा वर्जन से भी ज्यादा टेस्टिंग की जरूरत होती जिससे इसमें जल्दी-जल्दी अपडेट दिया जाता है इसमें डेवलपर्स द्वारा बड़े बदलाव किए जाते हैं।
और आखिरी और चौथा वर्जन वर्जन kinary version है इसे हम unstable वर्जन भी कहते हैं यह मुख्य रूप से नए बदलाव, नई चीज जोड़ने के लिए डेवलपमेंट code के साथ अपडेट किया जाता है।
इतना जान लेने के बाद यह सवाल आता है कि क्या हम चारों वर्जन को एक साथ यूज़ कर सकते हैं तो नहीं इससे आपको दिक्कत आ सकती है।
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